प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड शासन के सचिव बेसिक शिक्षा अनुभाग-1 के निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर नैनीताल द्वारा उत्तराखण्ड अध्यापक पात्रता परीक्षा UTET-I एवं UTET-II 2026 का आयोजन 29 सितंबर 2026 मंगलवार को जनपद हरिद्वार में दो पालियों में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 4:30 बजे तक आयोजित होगी। जनपद में परीक्षा के लिए हरिद्वार शहर में आठ और रुड़की शहर में 10 कुल 18 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा के शांतिपूर्ण नकलविहीन और सुव्यवस्थित संचालन के लिए जिला प्रशासन ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए मजिस्ट्रेटों और अधिकारियों की तैनाती की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार तथा उपजिलाधिकारी हरिद्वार एवं रुड़की को सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के बाहर अथवा भीतर किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता धमकी मारपीट या अनुचित साधनों के प्रयोग की कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक सुरक्षित वातावरण में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जनपद के कोषागार एवं उपकोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित रखा जाएगा। जिन उपकोषागारों में डबल लॉक की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है वहां सशस्त्र सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। परीक्षा के प्रभावी संचालन के लिए हरिद्वार और रुड़की के सभी परीक्षा केंद्रों पर सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेट परीक्षा केंद्रों का लगातार निरीक्षण करेंगे संवेदनशील केंद्रों की विशेष निगरानी रखेंगे तथा परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलविहीन ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तरदायी होंगे। मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार परीक्षा संचालन से संबंधित समस्त व्यवस्थाओं के नोडल अधिकारी रहेंगे। परीक्षा संपन्न होने के बाद सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट अपनी कुशलता रिपोर्ट तत्काल अपर जिलाधिकारी प्रशासन हरिद्वार को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा की निष्पक्षता गोपनीयता और कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
