प्रदीप कुमार
कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। सरकार भले ही बाल विकास और नौनिहालों को बेहतर शिक्षा एवं पोषण उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो लेकिन धरातल पर तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है। कीर्तिनगर विकासखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विद्यालय पूर्व शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि विकासखंड मुख्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र जाखनी में भी पेयजल बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। केंद्र में पंखे तो लगाए गए हैं लेकिन बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण ये महज शोपीस बने हुए हैं। भीषण गर्मी में नन्हे बच्चे बिना पंखों की हवा के केंद्र में समय बिताने को मजबूर हैं। वहीं केंद्र में पानी की टंकियां होने के बावजूद जल संयोजन नहीं किया गया है। शौचालय की व्यवस्था भी नहीं होने से बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सैनिक बलवीर सिंह कैन्तुरा ने केंद्र की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब विभागीय अधिकारियों से विद्युत कनेक्शन के संबंध में जानकारी मांगी जाती है तो उनका जवाब होता है कि विद्युत विभाग में आवेदन किया गया है और जल्द ही बिजली आपूर्ति सुचारू हो जाएगी। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि जब केंद्र की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जाती है तो जिम्मेदारों की ओर से सवाल किया जाता है कि बिजली के बिल का भुगतान कौन करेगा। ऐसे में नौनिहालों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय जिम्मेदारी से बचने की स्थिति सामने आ रही है। कैन्तुरा ने संबंधित विभाग से आंगनबाड़ी केंद्र जाखनी में बिजली पेयजल और शौचालय की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब विकासखंड मुख्यालय के नजदीक स्थित केंद्रों की यह स्थिति है तो दूरस्थ क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यवस्थाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से सभी केंद्रों का निरीक्षण कर नौनिहालों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
