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प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी की जाएगी। इसके लिए असामान्य लिंगानुपात वाले गांवों को रेड जोन में चिह्नित किया जाएगा और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सघन निगरानी की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जनपद में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लिंगानुपात की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तराखंड का लिंगानुपात 939 के मुकाबले देहरादून का लिंगानुपात 927 दर्ज किया गया है। उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के लिंगानुपात संबंधी आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने के निर्देश दिए। असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जनपद के सभी 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और गर्भवती महिलाओं की प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कन्या भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के विरुद्ध अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। मानक पूरे होने पर ही मिलेगा नया पंजीकरण बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पंजीकरण और नवीनीकरण से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की अनापत्ति अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की अनिवार्य रूप से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले केंद्रों को ही अनुमति दी जाए। आवश्यक अभिलेखों के अभाव में किसी भी केंद्र का पंजीकरण या नवीनीकरण नहीं किया जाए। इस वर्ष 117 केंद्रों का निरीक्षण तीन केंद्रों की मशीनें सील मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जनपद में वर्तमान में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्र संचालित हैं। इनमें 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं। जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति ने सितंबर माह में 84 केंद्रों का निरीक्षण किया। वर्ष 2026 में अब तक कुल 117 केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन केंद्रों की मशीनें सील की गई हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष जिले का लिंगानुपात 927 से बढ़कर 937 हो गया है। जनपद में सबसे कम लिंगानुपात डोईवाला और कालसी में दर्ज किया गया है। वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में 885 सहसपुर में 924 रायपुर में 949 कालसी में 887 विकासनगर में 1000 और चकराता में 1060 लिंगानुपात दर्ज किया गया है। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व केके मिश्रा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.मनोज कुमार शर्मा पीसीपीएनडीटी के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.बिमलेश जोशी जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट जिला शासकीय अधिवक्ता और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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