प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए केवल बीमारी का उपचार ही नहीं बल्कि दर्द से राहत बेहतर देखभाल और परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण है। विश्व पैलिएटिव केयर दिवस के अवसर पर जनपद की विभिन्न चिकित्सा इकाइयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में चिकित्सकों ने असाध्य रोगों में दर्द प्रबंधन और मरीजों की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देशन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कांडई दशज्यूला चंद्रनगर घिमतोली चोपड़ा दुर्गाधार और खेड़ाखाल में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि पैलिएटिव केयर ऐसी स्वास्थ्य सेवा है जिसका उद्देश्य गंभीर और असाध्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को दर्द तथा अन्य परेशानियों से राहत देना और उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना है। कैंसर लकवा और अन्य दीर्घकालिक रोगों से जूझ रहे मरीजों को कई बार लंबे समय तक दर्द सांस लेने में परेशानी थकान भूख कम लगना नींद न आना और बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चिकित्सकों ने बताया कि पैलिएटिव केयर के माध्यम से इन लक्षणों को नियंत्रित करने और मरीज को अधिक आराम देने का प्रयास किया जाता है। यह देखभाल केवल बीमारी के अंतिम चरण तक सीमित नहीं है बल्कि गंभीर बीमारी के उपचार के साथ भी इसकी जरूरत पड़ सकती है। समय पर देखभाल और चिकित्सकीय परामर्श से मरीज की परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि मरीज की शारीरिक जरूरतों के साथ उसकी मानसिक भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है। मरीज को समय पर दवा देना उसकी साफ सफाई बनाए रखना भोजन और आराम का ध्यान रखना तथा चिकित्सकीय सलाह का पालन करना महत्वपूर्ण है। दर्द निवारक दवाओं सहित अन्य औषधियों का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। वहीं आयुष्मान आरोग्य मंदिर कांडई बच्छणस्यूं माईकोटी मालकोटी कुरझण कोठगी लदोली लंबगौंडी जग्गी बगवान स्यूंर सेमलता और खांखरा के क्षेत्रांतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की देखभाल और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक सहयोग देने के प्रति जागरूक किया। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने ग्रामीणों को घर पर मरीजों की देखभाल के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को शारीरिक तकलीफ के साथ डर चिंता अकेलेपन और निराशा का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को मरीज की बात सुननी चाहिए उसकी भावनाओं को समझना चाहिए और उसे भावनात्मक सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीज को बीमारी के कारण अलग थलग करने के बजाय उसकी जरूरतों का ध्यान रखना और उसे परिवार का हिस्सा बनाए रखना जरूरी है। परिवार के सहयोग संवेदनशील व्यवहार और समय पर चिकित्सकीय परामर्श से मरीज को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
