प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वावधान में जनपद के विभिन्न विद्यालयों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मानसिक परेशानियों पर खुलकर बात करने समय पर मदद लेने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारुल गोयल के निर्देशन में राजकीय इंटर कॉलेज परकंडी में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में वक्ता डॉ. शालिनी बुटोला ने मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक रोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्याएं किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। इन्हें कमजोरी या सामाजिक कलंक मानने के बजाय स्वास्थ्य समस्या के रूप में समझना चाहिए। समय पर पहचान विशेषज्ञ से परामर्श और नियमित उपचार से स्थिति में सुधार संभव है। जिला विधिक प्राधिकरण की अधिवक्ता यशोदा खत्री ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनी पहलुओं और विद्यार्थियों के अधिकारों की जानकारी दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार रावत ने छात्र-छात्राओं को जीवन की चुनौतियों और प्रतिस्पर्धा का सामना सकारात्मक सोच के साथ करने के लिए प्रेरित किया। मूल्यांकन एवं निगरानी अधिकारी नागेश्वर बगवाड़ी के संयोजन में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में साक्षी ने प्रथम जान्हवी ने द्वितीय और कोमल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक विनय सेमवाल और काउंसलर विपिन सेमवाल ने संयुक्त रूप से किया। जनपद के चंद्रापुरी मयाली पालाकुराली लंबगौंडी लदोली कोठगी तालजामण मनसूना सिद्धसौड़ रामपुर कांडई बच्छणस्यूं और राउलेंक सहित विभिन्न स्थानों के विद्यालयों में भी जागरूकता कार्यक्रम हुए। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य तनाव प्रबंधन और सकारात्मक जीवनशैली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पढ़ाई परीक्षा और प्रतिस्पर्धा के दबाव से विद्यार्थी तनावग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी परेशानियां परिवार शिक्षकों या विश्वसनीय व्यक्तियों से साझा करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी गई। पीएचसी चंद्रनगर और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जग्गी बगवान कुरझण कंडाली तथा पूलन में आयोजित गोष्ठियों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के संभावित लक्षणों की जानकारी दी गई। इनमें लंबे समय तक उदास रहना लोगों से दूरी बनाना अत्यधिक थकान बेचैनी घबराहट लगातार चिंता या डर महसूस करना भावनाओं पर नियंत्रण में कठिनाई होना तथा ऐसी आवाजें सुनाई देना या आकृतियां दिखाई देना जिन्हें दूसरे लोग महसूस नहीं करते जैसे संकेत शामिल हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन लक्षणों से अपने आप किसी मानसिक रोग की पुष्टि नहीं होती। हालांकि परेशानी लंबे समय तक बनी रहने या दैनिक जीवन प्रभावित होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्व दें मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रहें और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने से न हिचकिचाएं।
