प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की मूल्यांकन व्यवस्था में संशोधन करने के साथ ही आंतरिक एवं सत्रीय परीक्षाओं में अनुपस्थित रहने वाले छात्र छात्राओं को दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय के अनुसार 9 सितंबर 2026 को सक्षम प्राधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रम में ये प्रावधान लागू किए गए हैं।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 30 और 70 के अनुपात में होगा मूल्यांकन
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत संचालित सभी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सतत मूल्यांकन एवं सत्रीय परीक्षा यानी आंतरिक मूल्यांकन तथा सत्रांत मूल्यांकन यानी बाह्य परीक्षा के अंकों का वितरण 30 और 70 के अनुपात में किया जाएगा। विश्वविद्यालय की संशोधित मूल्यांकन व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 और उसके बाद स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगी। वहीं शैक्षणिक सत्र 2025-26 अथवा उससे पहले प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी। ऐसे विद्यार्थियों के लिए प्रवेश के समय प्रभावी मूल्यांकन पद्धति ही लागू रहेगी।
आंतरिक परीक्षा में अनुपस्थित विद्यार्थियों को मिलेगा दोबारा अवसर
विश्वविद्यालय ने छात्र छात्राओं के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए स्नातक अथवा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के किसी भी सेमेस्टर की आंतरिक या सत्रीय परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने का निर्णय लिया है। इसके तहत संबंधित विद्यार्थी निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद आगामी किसी भी सम या विषम सेमेस्टर की संबंधित श्रेणी की आंतरिक या सत्रीय परीक्षा में दोबारा शामिल हो सकेंगे। हालांकि यह प्रावधान केवल आंतरिक या सत्रीय परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगा। इसे पहले प्राप्त अंकों में सुधार का अवसर नहीं माना जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित संकायाध्यक्षों विभागाध्यक्षों परिसर निदेशकों संबद्ध महाविद्यालयों और अन्य संबंधित अधिकारियों को अधिसूचना के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
