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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट टिहरी में आयोजित तीन दिवसीय क्रियात्मक अनुसंधान कार्यशाला के प्रथम चरण का शनिवार को समापन हुआ। कार्यशाला में जनपद के सभी विकासखंडों के प्रारंभिक विद्यालयों के 36 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान विद्यार्थियों की सीखने संबंधी समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने पर मंथन किया गया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने संस्थान का अनुश्रवण किया और कार्यशाला में शामिल शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षकों को विद्यार्थियों के हित को प्राथमिकता देते हुए कार्य करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में विद्यार्थियों की सीखने संबंधी कठिनाइयों को पहचानने और उनके समाधान खोजने में क्रियात्मक अनुसंधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अपर जिलाधिकारी ने संस्थान में डीएलएड प्रशिक्षुओं की प्रथम सेमेस्टर की चल रही परीक्षा का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के भौतिक एवं विज्ञान उत्कृष्टता केंद्र के अंतर्गत तैयार किए गए मॉडल प्रश्नपत्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये प्रश्नपत्र विद्यार्थियों को परिषदीय परीक्षाओं की बेहतर तैयारी करने में सहायक सिद्ध होंगे। डायट प्राचार्य और संकाय सदस्यों ने उन्हें 7 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को आयोजित परख आकलन के परिणामों की जानकारी भी दी। कार्यशाला समन्वयक देवेन्द्र सिंह भंडारी और सह समन्वयक डॉ.सुमन नेगी ने प्रतिभागियों को क्रियात्मक अनुसंधान की महत्ता आवश्यकता रूपरेखा और कार्यविधि की जानकारी दी। शिक्षकों ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद एनसीईआरटी द्वारा विकसित क्रियात्मक अनुसंधान प्रारूप के विभिन्न चरणों को समझने के लिए समूहवार चर्चा की। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों ने अपने विचार भी प्रस्तुत किए। अभ्यास के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों में हासिल के जोड़ में कठिनाई श्रुतलेख संबंधी समस्याएं भाग की संकल्पना स्पष्ट न होने परिमाप एवं क्षेत्रफल की समझ में कमी तथा 10 के गुणज वाली संख्याओं से जुड़ी कठिनाइयों जैसे विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यालयों में विद्यार्थियों की सीखने संबंधी समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने पर जोर दिया गया। कार्यशाला का द्वितीय चरण एक माह बाद आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में चिह्नित समस्याओं पर किए गए क्रियात्मक अनुसंधान के निष्कर्ष और प्रस्तुतीकरण साझा करेंगे। इस संबंध में कार्यशाला समन्वयक और सह समन्वयक ने प्रतिभागियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस अवसर पर डायट प्राचार्य दीपक रतूड़ी डॉ.वीर सिंह रावत सीमा शर्मा डॉ.राजकिशोर डॉ.विजय मोहन गैरोला रणजीत पंवार नीलम बागड़ी अंजली जोशी अभिषेक सेमवाल सुरेश रतूड़ी शुभम डोभाल सहित अन्य शिक्षक और संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।

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