प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर वीसीएसजी राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मनोरोग विभाग की ओर से एचएनबी बेस चिकित्सालय श्रीनगर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करने और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के साथ ही समय पर विशेषज्ञ से उपचार लेने के महत्व पर जोर दिया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम अनुभवों को सुनें वास्तविक आवाजों से आए बदलाव रही। इसके तहत मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को सुनने समझने तथा बिना किसी पूर्वाग्रह के स्वीकार करने की आवश्यकता बताई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ.दीपा हटवाल उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में डॉ.धनंजय डोभाल डॉ.मोनिका भंडारी डॉ.कृतिका जोशी और डॉ.शिवानी दर्जी शामिल रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों नर्सिंग अधिकारियों कनिष्ठ चिकित्सकों और मेडिकल छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया। मनोरोग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ.श्वेता कृष्णा ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते मामलों और उपचार सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में मौजूद अंतर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां और संकोच लोगों को उपचार लेने से रोकते हैं। कई बार चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी मानसिक रोगों के प्रति पूर्वाग्रह देखने को मिलते हैं। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों के बीच जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना आवश्यक है। सहायक प्रोफेसर डॉ.पार्थ दत्ता ने मेडिकल छात्रों और प्रशिक्षु चिकित्सकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक चिकित्सक को सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने प्रारंभिक उपचार देने और आवश्यकता पड़ने पर मरीज को विशेषज्ञ के पास भेजने की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने भविष्य के चिकित्सकों को मरीजों के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहने की सलाह दी। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ.मोहित सैनी ने मानसिक रोगों के सही मूल्यांकन सटीक निदान और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों को केवल तनाव व्यक्तित्व की कमजोरी या इच्छाशक्ति की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने से उचित उपचार और सुधार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक परिचर्चा में डॉ.मोहित सैनी डॉ.पार्थ दत्ता और डॉ.श्वेता कृष्णा ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं और आशंकाओं का समाधान किया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में साझा करने मनोरोगों से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने तथा उपचार और दवाओं से संबंधित सवालों पर चर्चा की गई। गढ़वाल विश्वविद्यालय के शोध छात्र गौरव वर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के संबंध में अपने विचार और अनुभव साझा किए। उन्होंने गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में समय पर उपचार लेने चिकित्सकीय सलाह का पालन करने और दवाओं का नियमित सेवन करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उचित उपचार से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है और प्रत्येक मानसिक रोग में जीवनभर दवाएं लेना आवश्यक नहीं होता। कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने या उनसे डरने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। मानसिक रोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर और समय पर विशेषज्ञ की सहायता लेकर प्रभावित व्यक्तियों को बेहतर जीवन जीने में मदद की जा सकती है।
