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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। बालों का झड़ना और सिर की त्वचा पर जगह-जगह बालों का कम होना व्यक्ति के आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसी ही समस्या से जूझ रहीं सुनीता का नरेंद्रनगर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार किया गया। उपचार के बाद उनके सिर की त्वचा पर बालों की दोबारा वृद्धि देखी गई और प्रभावित स्थानों पर बालों के झड़ने से बने पैच का क्षेत्र धीरे-धीरे कम होने लगा। इससे सुनीता को काफी राहत और संतोष मिला। सुनीता को करीब छह माह से सिर के ऊपरी हिस्से में बाल झड़ने की समस्या थी। चिकित्सकीय जांच में सिर की त्वचा पर लगभग दो से तीन स्थानों पर बाल झड़ने के कारण पैच पाए गए। चिकित्सकीय रूप से इस स्थिति को एलोपेशिया एरियाटा के रूप में दर्ज किया गया है। आयुर्वेद में इस समस्या का संदर्भ इन्द्रलुप्त से जोड़ा जाता है। इस मामले में अपर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.वंदना डंगवाल ने उपचार की योजना तैयार की। इसके अंतर्गत शोधन चिकित्सा में दीपन-पाचन और जलौकावचरण चिकित्सा को शामिल किया गया। जलौकावचरण चिकित्सा सप्ताह में एक बार दो माह तक किए जाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए लगभग आठ सिटिंग निर्धारित की गईं। इसके साथ ही शमन चिकित्सा के अंतर्गत आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग और प्रभावित स्थानों पर लेपन कर्म भी किया गया। उपचार में इन आयुर्वेदिक औषधियों का किया गया प्रयोग सुनीता के उपचार में संजीवनी वटी महामंजिष्ठादि क्वाथ भृंगराज चूर्ण त्रिफला चूर्ण और भृंगराज चूर्ण के लेप का प्रयोग किया गया। उपचार के दौरान रोगी की स्थिति को क्लीनिकल फोटोग्राफ के माध्यम से दर्ज किया गया ताकि समय के साथ होने वाले बदलावों का अवलोकन किया जा सके। उपचार के बाद सुनीता के लक्षणों में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा। नियमित उपचार के साथ सिर की त्वचा पर जिन स्थानों पर पहले बाल झड़ने के कारण पैच बन गए थे वहां क्रमशः बालों की दोबारा वृद्धि देखी गई। प्रभावित स्थानों पर बाल वापस आने लगे और पैच का क्षेत्र कम होता गया। इस सुधार से सुनीता को काफी राहत महसूस हुई। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी दिया जोर डॉ.वंदना डंगवाल ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोग होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं है बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी मार्गदर्शन करता है। आयुर्वेदिक जीवनशैली में संतुलित आहार नियमित दिनचर्या पर्याप्त नींद स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि इन सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाया जाए तो कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने और स्वास्थ्य के प्रति समय रहते सावधानी बरतने में मदद मिल सकती है। आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाकर व्यक्ति अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रह सकता है तथा स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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