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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड राज्य शाखा के 29वें वार्षिक आईएपीएसएम सम्मेलन आईएपीएसएमयूपीयूकेकॉन-2026 का शुभारंभ 23 अक्टूबर को होगा। दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से पहुंचने वाले जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित जनस्वास्थ्य सेवाओं सहित स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन से एक दिन पहले 22 अक्टूबर को प्री-कान्फ्रेंस वर्कशॉप भी आयोजित की जाएगी जिसमें अलग-अलग विभागों के 100 स्नातकोत्तर चिकित्सकों को शोध के विभिन्न आयामों और नई तकनीकों का प्रशिक्षण देकर पारंगत किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य विषय जलवायु-सक्षम एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जनस्वास्थ्य के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को सुदृढ़ करना है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जनस्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक सुलभ और किफायती तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उपायों पर चर्चा करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के प्रदेश में सुलभ गुणवत्तापूर्ण एवं जनहितकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के प्रयासों के अनुरूप यह सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलते पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के साथ उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सक्षम और आधुनिक तथा जन केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में विशेषज्ञों के बीच होने वाला विचार-विमर्श जनस्वास्थ्य की चुनौतियों के समाधान तलाशने और तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है। सम्मेलन के मुख्य सलाहकार एवं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत ने बताया कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को जलवायु संबंधी चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग रोगों की निगरानी और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण तथा बेहतर स्वास्थ्य नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सम्मेलन में विशेषज्ञ इन विषयों पर अपने अनुभव और शोध साझा करेंगे।क्षसम्मेलन का शुभारंभ प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल तथा शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत करेंगे। कार्यक्रम में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.भानु दुग्गल और मिशन निदेशक एनएचएम डॉ.संदीप तिवारी तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ.आशुतोष सयाना एवं पौड़ी की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.मेघना असवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत ने बताया कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। संस्थान चिकित्सा सेवाओं के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य गतिविधियों और जनस्वास्थ्य से जुड़ी पहलों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। सम्मेलन की आयोजन अध्यक्ष डॉ.जानकी बर्त्वाल और आयोजन सचिव डॉ.सुरेंद्र सिंह ने बताया कि यह आयोजन जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव तथा नवीन शोध साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। सम्मेलन के माध्यम से चिकित्सा विशेषज्ञों और शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में एम्स नागपुर और दिल्ली तथा रांची एवं ऋषिकेश सहित देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श जनस्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण तथा प्रभावी बनाने के साथ सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित होगा। यह सम्मेलन चिकित्सा शिक्षा और शोध तथा आधुनिक तकनीक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान तलाशने और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नए विचारों एवं नवाचारों को प्रोत्साहित करेगा।

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