प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत युवा संगम कार्यक्रम के सातवें चरण की नोडल एजेंसी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के तत्वावधान में उत्तराखंड भ्रमण पर आए पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल मंडल के प्रमुख पर्यटन और तकनीकी स्थलों का शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने गढ़वाल की प्राकृतिक सुंदरता समृद्ध लोकसंस्कृति पारंपरिक मेहमाननवाजी और तकनीकी प्रगति को करीब से जाना। भ्रमण की शुरुआत पौड़ी जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खिर्सू से हुई। यहां पहुंचने पर स्थानीय ग्रामीणों और बासा होमस्टे प्रबंधन की ओर से अतिथियों का रोली-तिलक लगाकर और तुलसी की माला पहनाकर पारंपरिक ढोल-दमाऊ की सुमधुर ध्वनि के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को दोपहर के भोजन में उत्तराखंड के पारंपरिक गढ़वाली व्यंजन परोसे गए। सभी सदस्यों ने स्थानीय व्यंजनों की सराहना की। संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रौद्योगिकी संबंधी जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से टिहरी बांध का भ्रमण किया। यहां प्रतिनिधियों ने बांध परिसर और संग्रहालय का अवलोकन किया। जल विद्युत परियोजना के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टिहरी बांध के निर्माण उसकी कार्यप्रणाली और उन्नत तकनीक से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। भ्रमण कार्यक्रम के दौरान युवा संगम के राज्य नोडल अधिकारी प्रो.महाबीर सिंह नेगी के साथ आयोजन टीम के सदस्य डॉ.हिमशिखा गुसाईं डॉ.नरेंद्र कुमार और डॉ. सर्वेश उनियाल उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल से आए पांच फैकल्टी सदस्यों की देखरेख में सभी प्रतिनिधि विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल की श्रीनगर इकाई के जवान तत्परता से सुरक्षा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति इस अंतरराज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वह प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा आवास भोजन और शैक्षणिक भ्रमण से संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित जानकारी ले रहे हैं। पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों ने गढ़वाल की प्राकृतिक सुंदरता समृद्ध लोकसंस्कृति तकनीकी प्रगति और पारंपरिक मेहमाननवाजी की सराहना की। यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति परंपराओं और तकनीकी उपलब्धियों से परिचित कराने के साथ आपसी समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
