देवदूत बनी पुलिस और गाँव के जवान: तुंगनाथ के जंगल से ट्रैकर को सकुशल निकाला
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड की बर्फीली चोटियाँ, जहाँ रोमांच है,वहीं खतरा भी है आज 24 अक्टूबर 2025 को पुलिस को सूचना मिली की तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रैकिंग रूट पर एक ट्रैकर अपने समूह से बिछड़ कर,रावण शीला के पास स्थित घने,खूंखार जंगल में भटक गया। ठंड और जंगली जानवरों के डर के बीच,यात्री के अस्तित्व पर संकट गहरा गया।सूचना मिलते ही,धोतीधार पुलिस चौकी पर तैनात,अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित,कॉन्स्टेबल राकेश ने स्थिति की गंभीरता को समझा। बिना समय गंवाए,उन्होंने तत्काल स्थानीय ट्रैकिंग गाइड और जांबाज ग्रामीणों की एक टीम तैयार की।घनघोर अंधेरा,शून्य से नीचे गिरता तापमान,और दुर्गम पथ कॉन्स्टेबल राकेश के नेतृत्व में, टीम ने रात के सन्नाटे को चीरते हुए,अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल के कोने-कोने को छान मारा। हर मिनट यात्री के लिए भारी पड़ रहा था,लेकिन पुलिस की धुन अटूट थी।घंटों की अथक खोजबीन,और मुश्किलों से लोहा लेने के बाद,आखिरकार सफलता मिली देर रात 3:00 बजे के करीब,पुलिस की टीम ने उस हताश और बेहाल यात्री को जंगल के एक बीहड़ हिस्से से सकुशल ढूंढ निकाला। उसे तत्काल धोतीधार पुलिस चौकी लाया गया,जहाँ प्राथमिक उपचार दिया गया।सुबह होते ही,इंसानियत का परिचय देते हुए,पुलिस ने यात्री को उसके प्रतीक्षारत और अत्यंत भावुक परिजनों के हवाले कर दिया। परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस व स्थानीय युवकों की इस अदम्य साहस और मानवीयता के लिए हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया।
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देवदूत बनी पुलिस और गाँव के जवान: तुंगनाथ के जंगल से ट्रैकर को सकुशल निकाला
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड की बर्फीली चोटियाँ, जहाँ रोमांच है,वहीं खतरा भी है आज 24 अक्टूबर 2025 को पुलिस को सूचना मिली की तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रैकिंग रूट पर एक ट्रैकर अपने समूह से बिछड़ कर,रावण शीला के पास स्थित घने,खूंखार जंगल में भटक गया। ठंड और जंगली जानवरों के डर के बीच,यात्री के अस्तित्व पर संकट गहरा गया।सूचना मिलते ही,धोतीधार पुलिस चौकी पर तैनात,अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित,कॉन्स्टेबल राकेश ने स्थिति की गंभीरता को समझा। बिना समय गंवाए,उन्होंने तत्काल स्थानीय ट्रैकिंग गाइड और जांबाज ग्रामीणों की एक टीम तैयार की।घनघोर अंधेरा,शून्य से नीचे गिरता तापमान,और दुर्गम पथ कॉन्स्टेबल राकेश के नेतृत्व में, टीम ने रात के सन्नाटे को चीरते हुए,अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल के कोने-कोने को छान मारा। हर मिनट यात्री के लिए भारी पड़ रहा था,लेकिन पुलिस की धुन अटूट थी।घंटों की अथक खोजबीन,और मुश्किलों से लोहा लेने के बाद,आखिरकार सफलता मिली देर रात 3:00 बजे के करीब,पुलिस की टीम ने उस हताश और बेहाल यात्री को जंगल के एक बीहड़ हिस्से से सकुशल ढूंढ निकाला। उसे तत्काल धोतीधार पुलिस चौकी लाया गया,जहाँ प्राथमिक उपचार दिया गया।सुबह होते ही,इंसानियत का परिचय देते हुए,पुलिस ने यात्री को उसके प्रतीक्षारत और अत्यंत भावुक परिजनों के हवाले कर दिया। परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस व स्थानीय युवकों की इस अदम्य साहस और मानवीयता के लिए हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया।