प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर परिसर में ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर समाधि मंदिर एवं प्रतिमा का अनावरण किया गया। समारोह के समापन अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य अतिथियों ने समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, धर्मगुरु,सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेतृत्व उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र चेतना,सनातन संस्कृति,गुरु-शिष्य परंपरा और मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गंगा तट पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने मां गंगा को नमन करते हुए ऋषि-मुनियों की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज भले ही आज शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं,लेकिन उनकी साधना,विचार और जीवन दर्शन आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा उनके मूल्यों और विचारधारा को पुनः जागृत करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार केवल एक तीर्थ स्थल नहीं,बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यहीं से भारतीय संस्कृति की अखंड धारा प्रवाहित होती है। राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं,बल्कि सांस्कृतिक जड़ों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि संस्कृति कमजोर होती है तो राष्ट्र भी कमजोर होता है। उन्होंने सनातन संस्कृति,अद्वैत वेदांत,भक्ति परंपरा और गुरु-शिष्य संवाद को भारत की आत्मा बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिकता और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं,बल्कि पूरक हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कार जुड़ जाएं तो राष्ट्र को कोई कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक विशिष्ट जीवन दर्शन प्रस्तुत किया। भारत माता मंदिर की स्थापना के माध्यम से उन्होंने राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक गौरव को मूर्त रूप दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड विकास और विरासत के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज सनातन परंपरा के सशक्त ध्वजवाहक थे। करुणा,मैत्री और राष्ट्रभक्ति उनके जीवन के मूल मूल्य थे। उन्होंने भारत माता मंदिर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया,जो जाति,क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे देश को एक सूत्र में बांधता है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत माता मंदिर की स्थापना एक दूरदर्शी राष्ट्र मंदिर की अवधारणा के साथ की गई थी,जिसे आज और अधिक सशक्त स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने चारधाम मार्गों पर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाले चिकित्सकों के कार्य की भी सराहना की। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज राष्ट्र,धर्म और मानव चेतना के पथप्रदर्शक थे।उनका जीवन सनातन संस्कृति,राष्ट्र धर्म और मानव कल्याण को समर्पित रहा। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संत समाज से उन्हें सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता रहा है और इस आयोजन में शामिल होना उनके लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि,कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद,मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश,महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद,महामंडलेश्वर गोविंददेव गिरि,महामंडलेश्वर ललितानंद,उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी,पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक,ऋषिकेश विधायक प्रेम चंद्र अग्रवाल,राज्य मंत्री विनय रोहिला,शोभाराम प्रजापति,ओम प्रकाश जमदग्नि,भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा,शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा,कुंभ मेलाधिकारी सोनिका,जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून अजय सिंह, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी,अनुयायी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर परिसर में ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर समाधि मंदिर एवं प्रतिमा का अनावरण किया गया। समारोह के समापन अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य अतिथियों ने समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, धर्मगुरु,सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेतृत्व उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र चेतना,सनातन संस्कृति,गुरु-शिष्य परंपरा और मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गंगा तट पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने मां गंगा को नमन करते हुए ऋषि-मुनियों की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज भले ही आज शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं,लेकिन उनकी साधना,विचार और जीवन दर्शन आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा उनके मूल्यों और विचारधारा को पुनः जागृत करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार केवल एक तीर्थ स्थल नहीं,बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यहीं से भारतीय संस्कृति की अखंड धारा प्रवाहित होती है। राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं,बल्कि सांस्कृतिक जड़ों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि संस्कृति कमजोर होती है तो राष्ट्र भी कमजोर होता है। उन्होंने सनातन संस्कृति,अद्वैत वेदांत,भक्ति परंपरा और गुरु-शिष्य संवाद को भारत की आत्मा बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिकता और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं,बल्कि पूरक हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कार जुड़ जाएं तो राष्ट्र को कोई कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक विशिष्ट जीवन दर्शन प्रस्तुत किया। भारत माता मंदिर की स्थापना के माध्यम से उन्होंने राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक गौरव को मूर्त रूप दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड विकास और विरासत के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज सनातन परंपरा के सशक्त ध्वजवाहक थे। करुणा,मैत्री और राष्ट्रभक्ति उनके जीवन के मूल मूल्य थे। उन्होंने भारत माता मंदिर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया,जो जाति,क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर पूरे देश को एक सूत्र में बांधता है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत माता मंदिर की स्थापना एक दूरदर्शी राष्ट्र मंदिर की अवधारणा के साथ की गई थी,जिसे आज और अधिक सशक्त स्वरूप दिया जा रहा है। उन्होंने चारधाम मार्गों पर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाले चिकित्सकों के कार्य की भी सराहना की। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज राष्ट्र,धर्म और मानव चेतना के पथप्रदर्शक थे।उनका जीवन सनातन संस्कृति,राष्ट्र धर्म और मानव कल्याण को समर्पित रहा। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संत समाज से उन्हें सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता रहा है और इस आयोजन में शामिल होना उनके लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि,कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद,मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश,महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद,महामंडलेश्वर गोविंददेव गिरि,महामंडलेश्वर ललितानंद,उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी,पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक,ऋषिकेश विधायक प्रेम चंद्र अग्रवाल,राज्य मंत्री विनय रोहिला,शोभाराम प्रजापति,ओम प्रकाश जमदग्नि,भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा,शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा,कुंभ मेलाधिकारी सोनिका,जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून अजय सिंह, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी,अनुयायी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।