प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। मानसून सत्र से पूर्व आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने जिला आपदा प्रबंधन सभागार में गूगल मीट के माध्यम से बैठक आयोजित की। बैठक में लोक निर्माण विभाग सिंचाई विभाग हरिद्वार और रुड़की लघु सिंचाई ग्रामीण निर्माण विभाग पेयजल निगम सभी विकासखंडों के विभागाध्यक्ष नोडल अधिकारी और आपदा प्रबंधन अधिकारी शामिल हुए। बैठक में अपर जिलाधिकारी ने विगत वर्ष आपदा न्यूनीकरण और नॉन एसडीआरएफ तथा अनटाइड फंड के अंतर्गत प्रस्तावित उन कार्यों की समीक्षा की जो अपरिहार्य कारणों से स्वीकृत नहीं हो पाए थे। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे प्रस्तावों का पुनः परीक्षण कर उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार अपडेट किया जाए तथा अति आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को नियमानुसार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और जानमाल की क्षति को कम करने के लिए प्रस्तावों और आगणनों को टुकड़ों में विभाजित न किया जाए। सभी प्रस्ताव शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार समुचित रूप से तैयार कर भेजे जाएं। उन्होंने सभी विभागों को न्यूनीकरण नॉन एसडीआरएफ एसडीआरएफ और अनटाइड फंड से संबंधित दिशा-निर्देशों का भलीभांति अध्ययन कर समय पर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि मानसून से पहले आवश्यक कार्य पूरे किए जा सकें। अपर जिलाधिकारी ने मानसून से पूर्व सभी स्थानीय निकायों नगर निगम हरिद्वार और रुड़की विकासखंडों तथा लोक निर्माण विभाग को अपने-अपने क्षेत्रों में छोटे-बड़े नालों और कलवर्ट की पूरी सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 30 मई तक सफाई कार्य पूरा कर प्रमाण पत्र आपदा प्रबंधन विभाग को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिकारी से कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी विकासखंडों और स्थानीय निकायों के क्षेत्रों में नालों की सफाई जलभराव वाले संवेदनशील स्थलों तथा पानी की त्वरित निकासी के लिए उपलब्ध पंपसेट और अन्य संसाधनों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। अपर जिलाधिकारी ने आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का परीक्षण करने उनकी मरम्मत कराने तथा आवश्यक खोज और बचाव उपकरणों एवं सामग्री की मांग तहसीलों के माध्यम से शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने नगर निगम हरिद्वार और रुड़की में कंट्रोल रूम सक्रिय करने तथा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विभागों और स्थानीय निकायों को नालों की सफाई की दैनिक लिखित रिपोर्ट प्रतिदिन शाम 4 बजे तक आपदा प्रबंधन कार्यालय को भेजने को कहा गया। बैठक में वर्तमान आंधी-तूफान की स्थिति को देखते हुए सड़क मार्गों और आवासीय कॉलोनियों तथा बस्तियों में जर्जर पेड़ों को हटाने और वृक्षों की समय पर लॉपिंग कराने के निर्देश भी दिए
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। मानसून सत्र से पूर्व आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने जिला आपदा प्रबंधन सभागार में गूगल मीट के माध्यम से बैठक आयोजित की। बैठक में लोक निर्माण विभाग सिंचाई विभाग हरिद्वार और रुड़की लघु सिंचाई ग्रामीण निर्माण विभाग पेयजल निगम सभी विकासखंडों के विभागाध्यक्ष नोडल अधिकारी और आपदा प्रबंधन अधिकारी शामिल हुए। बैठक में अपर जिलाधिकारी ने विगत वर्ष आपदा न्यूनीकरण और नॉन एसडीआरएफ तथा अनटाइड फंड के अंतर्गत प्रस्तावित उन कार्यों की समीक्षा की जो अपरिहार्य कारणों से स्वीकृत नहीं हो पाए थे। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे प्रस्तावों का पुनः परीक्षण कर उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार अपडेट किया जाए तथा अति आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को नियमानुसार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान और जानमाल की क्षति को कम करने के लिए प्रस्तावों और आगणनों को टुकड़ों में विभाजित न किया जाए। सभी प्रस्ताव शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार समुचित रूप से तैयार कर भेजे जाएं। उन्होंने सभी विभागों को न्यूनीकरण नॉन एसडीआरएफ एसडीआरएफ और अनटाइड फंड से संबंधित दिशा-निर्देशों का भलीभांति अध्ययन कर समय पर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि मानसून से पहले आवश्यक कार्य पूरे किए जा सकें। अपर जिलाधिकारी ने मानसून से पूर्व सभी स्थानीय निकायों नगर निगम हरिद्वार और रुड़की विकासखंडों तथा लोक निर्माण विभाग को अपने-अपने क्षेत्रों में छोटे-बड़े नालों और कलवर्ट की पूरी सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 30 मई तक सफाई कार्य पूरा कर प्रमाण पत्र आपदा प्रबंधन विभाग को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिकारी से कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी विकासखंडों और स्थानीय निकायों के क्षेत्रों में नालों की सफाई जलभराव वाले संवेदनशील स्थलों तथा पानी की त्वरित निकासी के लिए उपलब्ध पंपसेट और अन्य संसाधनों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। अपर जिलाधिकारी ने आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का परीक्षण करने उनकी मरम्मत कराने तथा आवश्यक खोज और बचाव उपकरणों एवं सामग्री की मांग तहसीलों के माध्यम से शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने नगर निगम हरिद्वार और रुड़की में कंट्रोल रूम सक्रिय करने तथा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विभागों और स्थानीय निकायों को नालों की सफाई की दैनिक लिखित रिपोर्ट प्रतिदिन शाम 4 बजे तक आपदा प्रबंधन कार्यालय को भेजने को कहा गया। बैठक में वर्तमान आंधी-तूफान की स्थिति को देखते हुए सड़क मार्गों और आवासीय कॉलोनियों तथा बस्तियों में जर्जर पेड़ों को हटाने और वृक्षों की समय पर लॉपिंग कराने के निर्देश भी दिए