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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में मंगलवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र एवं गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किए जाने के उपलक्ष्य में भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय परिवार जनप्रतिनिधियों सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने संबोधन में भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि पद्मभूषण सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उनके अभिनंदन से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने का अवसर होना चाहिए जिनके नेतृत्व में देश निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। कोश्यारी ने कहा कि वर्ष 2013 में राजनीति से संन्यास लेने के बाद जब उनके नाम पर राज्यपाल पद के लिए विचार हुआ था तब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा था कि उन्हें राज्यपाल बनना चाहिए क्योंकि यह राज्य के लिए गौरव की बात होगी। जबकि हरीश रावत उनके राजनीतिक विरोधी रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन का उल्लेख किया जिसमें केदारनाथ से उन्होंने कहा था कि अगला दशक उत्तराखंड का होगा। कोश्यारी ने कहा कि राज्य सरकार और ग्रामीण समाज इसी संकल्प को साकार करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के गांवों में लोग फल सब्जियां और स्थानीय उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के चलते पलायन की प्रवृत्ति में कमी आई है और लोग पुनःअपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोग चाहे देहरादून दिल्ली या देश-विदेश के किसी भी हिस्से में रहें उन्हें अपनी मातृभूमि के विकास के लिए योगदान देने की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जहां भी रहें अपने कार्य और आचरण से उत्तराखंड की श्रेष्ठ पहचान प्रस्तुत करें। सामाजिक समरसता के विषय पर बोलते हुए कोश्यारी ने कहा कि जाति-प्रथा समाज और राष्ट्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि अपने गांव में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहभोज कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को जातिगत भेदभाव से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड सरकार के मंत्रिमंडल मंत्री धन सिंह रावत ने पद्मभूषण से सम्मानित भगत सिंह कोश्यारी के सार्वजनिक जीवन सामाजिक योगदान और उत्तराखंड के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोश्यारी का जीवन जनसेवा सादगी और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी भारतीय राजनीति में सादगी ईमानदारी और जनहित के मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब राजनीति में नैतिक मूल्यों की चर्चा होती है तब कोश्यारी का व्यक्तित्व एक आदर्श के रूप में सामने आता है। उनके सार्वजनिक जीवन से युवाओं और जनप्रतिनिधियों को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय की एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों को भी सभी के समक्ष रखा। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग के निदेशक प्रो.पी.बी.सुब्रमण्यम गोविंद बल्लभ पंत अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी के निदेशक प्रो.विजय बंगा राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य प्रो.आशुतोष सयाना गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड के कुलसचिव डॉ.हरि मौल आजाद अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं अभिनंदन समिति के अध्यक्ष प्रो.धन सिंह बिष्ट प्रो.एम.एस. पंवार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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