प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ के दूरस्थ और दुर्गम गांवों में बीमार पशुओं का समय पर उपचार कभी पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था। पशु चिकित्सालयों की दूरी और परिवहन संबंधी कठिनाइयों के कारण कई बार पशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती थी जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। मात्र एक फोन कॉल पर पशु चिकित्सक पशुपालकों के घर-द्वार तक पहुंचकर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। 1962 मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट सेवा जनपद पौड़ी में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बनकर उभरी है और पशुपालकों की भरोसेमंद साथी साबित हो रही है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के अंतर्गत संचालित इस सेवा का शुभारंभ प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया था। वर्तमान में जनपद पौड़ी के द्वारीखाल एकेश्वर जयहरीखाल कल्जीखाल नैनीडांडा पाबौ पौड़ी तथा थलीसैंण विकासखंडों में आठ मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट संचालित की जा रही हैं। शेष विकासखंडों में भी इस सेवा के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं। इन यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को उनके घर-द्वार पर ही निःशुल्क पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेवा का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को केवल पशुपालन विभाग के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल करनी होती है। कॉल प्राप्त होने के बाद शिकायत संबंधित मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट को भेजी जाती है जिसके बाद चिकित्सकीय दल निर्धारित स्थान पर पहुंचकर पशुओं का उपचार करता है। प्रत्येक यूनिट में एक पशु चिकित्सक और एक पैरावेट कर्मचारी तैनात है। इसके साथ ही वाहनों को आवश्यक दवाइयों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है जिससे मौके पर ही प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सके। योजना की उपयोगिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जनपद में अब तक 59,336 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें 27,850 कॉल पशुओं के उपचार से संबंधित रही हैं जबकि अन्य कॉल पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं और तकनीकी परामर्श से जुड़ी थीं। अब तक 44,973 पशुओं का सफल उपचार किया जा चुका है जिससे हजारों पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि 1962 मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट सेवा का उद्देश्य पशुपालकों को त्वरित सुलभ और गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से दूरस्थ गांवों में रहने वाले पशुपालकों को भी समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल रही है। पशुओं में होने वाले रोगों का शीघ्र उपचार होने से उनकी उत्पादकता बढ़ी है तथा पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आई है। उन्होंने बताया कि जनपद में इस सेवा को लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और बड़ी संख्या में पशुपालक इसका लाभ उठा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि भविष्य में शेष विकासखंडों में भी मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट का संचालन शुरू किया जाए ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों को इसका लाभ मिल सके। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों से अपील की कि पशुओं के बीमार होने पर वे बिना किसी संकोच के 1962 हेल्पलाइन पर संपर्क कर निःशुल्क सेवाओं का लाभ उठाएं। यह सेवा दूरस्थ क्षेत्रों तक पशु स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और पशुपालकों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर सामने आई है।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ के दूरस्थ और दुर्गम गांवों में बीमार पशुओं का समय पर उपचार कभी पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था। पशु चिकित्सालयों की दूरी और परिवहन संबंधी कठिनाइयों के कारण कई बार पशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती थी जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। मात्र एक फोन कॉल पर पशु चिकित्सक पशुपालकों के घर-द्वार तक पहुंचकर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। 1962 मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट सेवा जनपद पौड़ी में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बनकर उभरी है और पशुपालकों की भरोसेमंद साथी साबित हो रही है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के अंतर्गत संचालित इस सेवा का शुभारंभ प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया था। वर्तमान में जनपद पौड़ी के द्वारीखाल एकेश्वर जयहरीखाल कल्जीखाल नैनीडांडा पाबौ पौड़ी तथा थलीसैंण विकासखंडों में आठ मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट संचालित की जा रही हैं। शेष विकासखंडों में भी इस सेवा के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं। इन यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को उनके घर-द्वार पर ही निःशुल्क पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेवा का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को केवल पशुपालन विभाग के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल करनी होती है। कॉल प्राप्त होने के बाद शिकायत संबंधित मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट को भेजी जाती है जिसके बाद चिकित्सकीय दल निर्धारित स्थान पर पहुंचकर पशुओं का उपचार करता है। प्रत्येक यूनिट में एक पशु चिकित्सक और एक पैरावेट कर्मचारी तैनात है। इसके साथ ही वाहनों को आवश्यक दवाइयों और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित किया गया है जिससे मौके पर ही प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सके। योजना की उपयोगिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जनपद में अब तक 59,336 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें 27,850 कॉल पशुओं के उपचार से संबंधित रही हैं जबकि अन्य कॉल पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं और तकनीकी परामर्श से जुड़ी थीं। अब तक 44,973 पशुओं का सफल उपचार किया जा चुका है जिससे हजारों पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि 1962 मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट सेवा का उद्देश्य पशुपालकों को त्वरित सुलभ और गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से दूरस्थ गांवों में रहने वाले पशुपालकों को भी समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल रही है। पशुओं में होने वाले रोगों का शीघ्र उपचार होने से उनकी उत्पादकता बढ़ी है तथा पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान में कमी आई है। उन्होंने बताया कि जनपद में इस सेवा को लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और बड़ी संख्या में पशुपालक इसका लाभ उठा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि भविष्य में शेष विकासखंडों में भी मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट का संचालन शुरू किया जाए ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों को इसका लाभ मिल सके। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों से अपील की कि पशुओं के बीमार होने पर वे बिना किसी संकोच के 1962 हेल्पलाइन पर संपर्क कर निःशुल्क सेवाओं का लाभ उठाएं। यह सेवा दूरस्थ क्षेत्रों तक पशु स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और पशुपालकों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर सामने आई है।