प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक मंथन कार्यक्रम के अंतर्गत एआई-संचालित भारत में भविष्य के सिविल सेवक:चुनौतियाँ और अवसर विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उत्तराखंड वन विभाग के सहायक वन संरक्षक डॉ.दिवाकर पंत उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्तमान समय में शासन-प्रशासन नीति निर्माण और जनसेवा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। ऐसे में भावी सिविल सेवकों के लिए इसके अवसरों और चुनौतियों को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है। मुख्य वक्ता डॉ.दिवाकर पंत ने अपने व्याख्यान में एआई आधारित प्रशासनिक प्रणालियों डिजिटल गवर्नेंस डेटा आधारित निर्णय निर्माण तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सिविल सेवकों को तकनीकी दक्षता नैतिक निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने एआई के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही डेटा गोपनीयता एल्गोरिद्मिक पक्षपात साइबर सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। डॉ.पंत ने वन प्रबंधन के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विशेष चर्चा करते हुए बताया कि एआई रिमोट सेंसिंग और उपग्रह प्रौद्योगिकी की सहायता से वनाग्नि की पूर्व चेतावनी जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान तथा त्वरित निगरानी संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन विभाग आग लगने की घटनाओं पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण स्थापित कर सकता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने जैव विविधता संरक्षण में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वन्यजीवों की निगरानी प्रजातियों की पहचान आवासीय क्षेत्रों के मानचित्रण तथा संरक्षण रणनीतियों के निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए विभिन्न प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं को भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने किया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए चर्चा को प्रभावी और संवादात्मक बनाया। कार्यक्रम में डॉ.प्रकाश सिंह डॉ.अरविंद रावत डॉ.वीर सिंह डॉ.शैलेन्द्र चमोला तथा डॉ.मुकेश एच.सहाय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों शोधार्थियों तथा विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विषय को अत्यंत समसामयिक और उपयोगी बताते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया। अंत में आयोजकों ने मुख्य वक्ता और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन भविष्य के प्रशासनिक परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर सार्थक विचार-विमर्श के साथ हुआ।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक मंथन कार्यक्रम के अंतर्गत एआई-संचालित भारत में भविष्य के सिविल सेवक:चुनौतियाँ और अवसर विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उत्तराखंड वन विभाग के सहायक वन संरक्षक डॉ.दिवाकर पंत उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्तमान समय में शासन-प्रशासन नीति निर्माण और जनसेवा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। ऐसे में भावी सिविल सेवकों के लिए इसके अवसरों और चुनौतियों को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है। मुख्य वक्ता डॉ.दिवाकर पंत ने अपने व्याख्यान में एआई आधारित प्रशासनिक प्रणालियों डिजिटल गवर्नेंस डेटा आधारित निर्णय निर्माण तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सिविल सेवकों को तकनीकी दक्षता नैतिक निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने एआई के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही डेटा गोपनीयता एल्गोरिद्मिक पक्षपात साइबर सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण जैसी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। डॉ.पंत ने वन प्रबंधन के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विशेष चर्चा करते हुए बताया कि एआई रिमोट सेंसिंग और उपग्रह प्रौद्योगिकी की सहायता से वनाग्नि की पूर्व चेतावनी जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान तथा त्वरित निगरानी संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन विभाग आग लगने की घटनाओं पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण स्थापित कर सकता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने जैव विविधता संरक्षण में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वन्यजीवों की निगरानी प्रजातियों की पहचान आवासीय क्षेत्रों के मानचित्रण तथा संरक्षण रणनीतियों के निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए विभिन्न प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं को भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने किया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए चर्चा को प्रभावी और संवादात्मक बनाया। कार्यक्रम में डॉ.प्रकाश सिंह डॉ.अरविंद रावत डॉ.वीर सिंह डॉ.शैलेन्द्र चमोला तथा डॉ.मुकेश एच.सहाय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों शोधार्थियों तथा विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विषय को अत्यंत समसामयिक और उपयोगी बताते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया। अंत में आयोजकों ने मुख्य वक्ता और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन भविष्य के प्रशासनिक परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर सार्थक विचार-विमर्श के साथ हुआ।