प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नाज़िश कलीम की अध्यक्षता में सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ताओं की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पैनल अधिवक्ताओं द्वारा संचालित विभिन्न वादों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सचिव ने निःशुल्क विधिक सहायता व्यवस्था को अधिक प्रभावी गुणवत्तापूर्ण एवं जनोन्मुखी बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में सचिव नाज़िश कलीम ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के अनुरूप पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक समयबद्ध प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सभी पैनल अधिवक्ता अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा ईमानदारी और व्यावसायिक दक्षता के साथ करें तथा प्रत्येक लाभार्थी के विधिक अधिकारों एवं हितों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसलिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति को समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराना सभी पैनल अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान विधिक जागरूकता कार्यक्रमों लोक अदालतों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सचिव ने पैनल अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि वे इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों तक निःशुल्क विधिक सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करें। बैठक में पैनल अधिवक्ताओं ने अपने-अपने वादों की वर्तमान स्थिति से सचिव को अवगत कराया तथा लंबित मामलों की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने निःशुल्क विधिक सहायता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के संबंध में अपने सुझाव भी साझा किए। बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि न्याय से वंचित किसी भी पात्र व्यक्ति तक समय पर विधिक सहायता पहुंचाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी पैनल अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नाज़िश कलीम की अध्यक्षता में सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ताओं की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पैनल अधिवक्ताओं द्वारा संचालित विभिन्न वादों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सचिव ने निःशुल्क विधिक सहायता व्यवस्था को अधिक प्रभावी गुणवत्तापूर्ण एवं जनोन्मुखी बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में सचिव नाज़िश कलीम ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के अनुरूप पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक समयबद्ध प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सभी पैनल अधिवक्ता अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा ईमानदारी और व्यावसायिक दक्षता के साथ करें तथा प्रत्येक लाभार्थी के विधिक अधिकारों एवं हितों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसलिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति को समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराना सभी पैनल अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान विधिक जागरूकता कार्यक्रमों लोक अदालतों तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सचिव ने पैनल अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि वे इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों तक निःशुल्क विधिक सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करें। बैठक में पैनल अधिवक्ताओं ने अपने-अपने वादों की वर्तमान स्थिति से सचिव को अवगत कराया तथा लंबित मामलों की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने निःशुल्क विधिक सहायता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के संबंध में अपने सुझाव भी साझा किए। बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि न्याय से वंचित किसी भी पात्र व्यक्ति तक समय पर विधिक सहायता पहुंचाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी पैनल अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।