प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भूगोल विभाग तथा इन्द्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर (हिमालयन क्लाइमेट एडप्टेशन एंड रेजिलिएन्स एजुकेशन प्रोग्राम) के अंतर्गत आयोजित एक माह के प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम का बुधवार को गरिमापूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल तथा उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखन्याली मंदार एवं कठुली गांवों में व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान उन्होंने स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित कर उनकी आजीविका प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का प्रयास किया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन तथा पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय जल प्रबंधन प्रणालियों का प्रलेखन भी किया गया। इस क्षेत्रीय अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जल सुरक्षा एवं जल स्रोत संरक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा सामुदायिक अनुकूलन क्षमता से जुड़े विभिन्न आयामों का वैज्ञानिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से अध्ययन करना था। प्रतिभागियों ने अध्ययन के दौरान प्राप्त आंकड़ों एवं अनुभवों के आधार पर क्षेत्र विशेष की समस्याओं तथा उनके संभावित समाधान भी प्रस्तुत किए। समापन समारोह में कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। मुख्य अतिथि जी.बी.पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान गढ़वाल प्रादेशिक केंद्र के निदेशक डॉ.के.चन्द्रशेखर ने प्रतिभागियों एवं आयोजकों को सफल प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम पर्वतीय क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को समझने तथा उनके वैज्ञानिक समाधान विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए गए अध्ययन को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में संकलित करने का सुझाव भी दिया ताकि भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं के निर्माण में उसका उपयोग किया जा सके। कार्यक्रम निदेशक वरिष्ठ प्रो.मोहन सिंह पंवार ने हिमालयी क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ते मानवीय दबाव के कारण जल स्रोतों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय अध्ययन भविष्य में जल संरक्षण एवं सामुदायिक विकास के लिए प्रभावी मॉडल सिद्ध होंगे तथा विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित करता रहेगा। इस अवसर पर प्रो.विजय कांत पुरोहित निदेशक एवं अध्यक्ष उच्च पर्वतीय पादप कार्यिकी अनुसंधान केंद्र डॉ.धीरज कुमार शर्मा डॉ.हसीबुर रहमान एवं डॉ.रंजन कर्माकर भी उपस्थित रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ.गौरव ने हिम-केयर कार्यक्रम की पिछले पांच वर्षों की यात्रा उपलब्धियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम की रूपरेखा से सभी को अवगत कराया। वहीं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सिद्धार्थ राणा ने प्रतिभागियों द्वारा क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान एकत्रित महत्वपूर्ण निष्कर्षों एवं अनुभवों का सार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.गौरव एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर तथा डॉ.सिद्धार्थ राणा प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ने संयुक्त रूप से किया। अंत में प्रतिभागियों ने अपने अध्ययन अनुभवों निष्कर्षों एवं सुझावों को साझा किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विशेषज्ञों शिक्षकों सहयोगी संस्थानों स्थानीय समुदायों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भूगोल विभाग तथा इन्द्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिमालयन रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में संचालित हिम-केयर (हिमालयन क्लाइमेट एडप्टेशन एंड रेजिलिएन्स एजुकेशन प्रोग्राम) के अंतर्गत आयोजित एक माह के प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम का बुधवार को गरिमापूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जनपद के नंदरूल एवं राजल तथा उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखन्याली मंदार एवं कठुली गांवों में व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान उन्होंने स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित कर उनकी आजीविका प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का प्रयास किया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन तथा पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय जल प्रबंधन प्रणालियों का प्रलेखन भी किया गया। इस क्षेत्रीय अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जल सुरक्षा एवं जल स्रोत संरक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा सामुदायिक अनुकूलन क्षमता से जुड़े विभिन्न आयामों का वैज्ञानिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से अध्ययन करना था। प्रतिभागियों ने अध्ययन के दौरान प्राप्त आंकड़ों एवं अनुभवों के आधार पर क्षेत्र विशेष की समस्याओं तथा उनके संभावित समाधान भी प्रस्तुत किए। समापन समारोह में कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। मुख्य अतिथि जी.बी.पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान गढ़वाल प्रादेशिक केंद्र के निदेशक डॉ.के.चन्द्रशेखर ने प्रतिभागियों एवं आयोजकों को सफल प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम पर्वतीय क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को समझने तथा उनके वैज्ञानिक समाधान विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए गए अध्ययन को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में संकलित करने का सुझाव भी दिया ताकि भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं के निर्माण में उसका उपयोग किया जा सके। कार्यक्रम निदेशक वरिष्ठ प्रो.मोहन सिंह पंवार ने हिमालयी क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ते मानवीय दबाव के कारण जल स्रोतों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय अध्ययन भविष्य में जल संरक्षण एवं सामुदायिक विकास के लिए प्रभावी मॉडल सिद्ध होंगे तथा विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित करता रहेगा। इस अवसर पर प्रो.विजय कांत पुरोहित निदेशक एवं अध्यक्ष उच्च पर्वतीय पादप कार्यिकी अनुसंधान केंद्र डॉ.धीरज कुमार शर्मा डॉ.हसीबुर रहमान एवं डॉ.रंजन कर्माकर भी उपस्थित रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ.गौरव ने हिम-केयर कार्यक्रम की पिछले पांच वर्षों की यात्रा उपलब्धियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप कार्यक्रम की रूपरेखा से सभी को अवगत कराया। वहीं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.सिद्धार्थ राणा ने प्रतिभागियों द्वारा क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान एकत्रित महत्वपूर्ण निष्कर्षों एवं अनुभवों का सार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.गौरव एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर तथा डॉ.सिद्धार्थ राणा प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ने संयुक्त रूप से किया। अंत में प्रतिभागियों ने अपने अध्ययन अनुभवों निष्कर्षों एवं सुझावों को साझा किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विशेषज्ञों शिक्षकों सहयोगी संस्थानों स्थानीय समुदायों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया।