प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीएसीई) एवं निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में "साप्ताहिक मंथन" कार्यक्रम का आयोजन "कॉमनवेल्थ गेम्स 2026" विषय पर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास महत्व भारत की उपलब्धियों तथा खेलों के माध्यम से नेतृत्व अनुशासन उत्कृष्टता और राष्ट्रीय एकता जैसे मूल्यों से परिचित कराना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार प्रस्तुत किए। अभिषेक ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास और उसके विकास पर विस्तार से जानकारी दी। मानसी ने खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों पर अपने विचार रखे। सचिन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया। विमल ने राष्ट्र निर्माण में खेलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खेल समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। दीपक ने खेल भावना अनुशासन और टीमवर्क के महत्व पर प्रकाश डाला। आश्विन ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से वैश्विक सहयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं में सकारात्मक सोच के विकास की आवश्यकता बताई। कनिका ने युवाओं में खेल संस्कृति और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अंकुल ने भारत में खेलों के बढ़ते अवसरों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। विपिन ने व्यक्तित्व विकास और राष्ट्रीय एकता में खेलों के योगदान को रेखांकित किया जबकि सौरभ ने युवाओं से समर्पण उत्कृष्टता और खेल भावना को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता के विकास का माध्यम नहीं हैं बल्कि वे नेतृत्व क्षमता आत्मविश्वास अनुशासन टीम भावना और सकारात्मक सोच का भी विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को जागरूक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया तथा सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रस्तुतिकरण की सराहना की। डॉ.आशीष बहुगुणा ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का समालोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए प्रत्येक वक्ता को विषय-वस्तु तथ्यों की सटीकता प्रस्तुति कौशल भाषा शैली और अभिव्यक्ति को लेकर रचनात्मक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक विमर्श प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में डॉ.प्रकाश कुमार सिंह डॉ.अरविंद रावत डॉ.मुकेश सहाय डॉ.शैलेन्द्र चमोला एवं डॉ.वीर सिंह सहित अनेक अभ्यर्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के विचारों की सराहना करते हुए उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने उत्कृष्टता सत्यनिष्ठा समावेशिता और खेल भावना को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन विपिन ने किया।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीएसीई) एवं निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में “साप्ताहिक मंथन” कार्यक्रम का आयोजन “कॉमनवेल्थ गेम्स 2026” विषय पर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास महत्व भारत की उपलब्धियों तथा खेलों के माध्यम से नेतृत्व अनुशासन उत्कृष्टता और राष्ट्रीय एकता जैसे मूल्यों से परिचित कराना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार प्रस्तुत किए। अभिषेक ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास और उसके विकास पर विस्तार से जानकारी दी। मानसी ने खेलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों पर अपने विचार रखे। सचिन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया। विमल ने राष्ट्र निर्माण में खेलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खेल समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। दीपक ने खेल भावना अनुशासन और टीमवर्क के महत्व पर प्रकाश डाला। आश्विन ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से वैश्विक सहयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान और युवाओं में सकारात्मक सोच के विकास की आवश्यकता बताई। कनिका ने युवाओं में खेल संस्कृति और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अंकुल ने भारत में खेलों के बढ़ते अवसरों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। विपिन ने व्यक्तित्व विकास और राष्ट्रीय एकता में खेलों के योगदान को रेखांकित किया जबकि सौरभ ने युवाओं से समर्पण उत्कृष्टता और खेल भावना को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता के विकास का माध्यम नहीं हैं बल्कि वे नेतृत्व क्षमता आत्मविश्वास अनुशासन टीम भावना और सकारात्मक सोच का भी विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को जागरूक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ-साथ खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया तथा सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रस्तुतिकरण की सराहना की। डॉ.आशीष बहुगुणा ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का समालोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए प्रत्येक वक्ता को विषय-वस्तु तथ्यों की सटीकता प्रस्तुति कौशल भाषा शैली और अभिव्यक्ति को लेकर रचनात्मक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक विमर्श प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में डॉ.प्रकाश कुमार सिंह डॉ.अरविंद रावत डॉ.मुकेश सहाय डॉ.शैलेन्द्र चमोला एवं डॉ.वीर सिंह सहित अनेक अभ्यर्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के विचारों की सराहना करते हुए उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने उत्कृष्टता सत्यनिष्ठा समावेशिता और खेल भावना को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन विपिन ने किया।