प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। कांवड़ मेला-2026 के दौरान हरिद्वार पुलिस ने संवेदनशीलता और मानवीय सेवा का परिचय देते हुए चार दिन से अपने परिजनों से बिछड़ी एक मूक-बधिर महिला और उसकी दो वर्षीय बच्ची को सकुशल उनके परिवार से मिलवा दिया। महिला न सुन सकती थी न बोल सकती थी और न ही पढ़-लिख सकती थी जिसके चलते उसकी पहचान और परिजनों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद कनखल पुलिस ने लगातार प्रयास करते हुए सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों की सहायता से परिजनों का पता लगाया और महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया। पुलिस के अनुसार 1 अगस्त 2026 को थाना कनखल को सूचना मिली कि शंकराचार्य चौक के पास एक महिला अपनी दो वर्षीय बच्ची के साथ रोती हुई मिली है। पूछताछ में पता चला कि वह अपने पति के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार आई थी लेकिन भीड़ में उनसे बिछड़ गई। महिला मूक-बधिर होने के साथ ही अशिक्षित भी थी जिससे वह अपना नाम-पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने उसे थाने लाकर महिला पुलिसकर्मियों की देखरेख में रखा और उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी। महिला और बच्ची की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने उन्हें रानीपुर स्थित वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित ठहराया। साथ ही अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन कर सोशल मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य माध्यमों से महिला की पहचान और परिजनों की तलाश के प्रयास लगातार जारी रखे। पुलिस की मेहनत रंग लाई और सोशल मीडिया के जरिए महिला के ससुर राजकुमार निवासी महेंद्र नगर (नेपाल) हाल निवासी गांधी नगर दिल्ली तक सूचना पहुंची। वह 4 अगस्त को थाना कनखल पहुंचे और महिला की पहचान अपनी पुत्रवधू सुमन तथा बच्ची की पहचान शिवानी के रूप में की। उन्होंने पुलिस को बताया कि महिला का पति करण उर्फ कर्मा जो स्वयं भी बोल नहीं पाता अभी तक घर नहीं पहुंचा है और संभवतः कांवड़ लेकर पैदल ही अपने घर लौट रहा है। परिजनों से मिलते ही महिला की आंखें नम हो गईं। उसने इशारों-इशारों में हरिद्वार पुलिस का आभार व्यक्त किया। इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों ने भी सराहना करते हुए पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली की प्रशंसा की। पुलिस टीम में कोतवाली कनखल प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह रावत वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनुज सिंह हेड कांस्टेबल संजय धनाई कांस्टेबल विजयपाल महिला कांस्टेबल प्रियंका एवं महिला कांस्टेबल सुमन भंडारी शामिल रहे।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। कांवड़ मेला-2026 के दौरान हरिद्वार पुलिस ने संवेदनशीलता और मानवीय सेवा का परिचय देते हुए चार दिन से अपने परिजनों से बिछड़ी एक मूक-बधिर महिला और उसकी दो वर्षीय बच्ची को सकुशल उनके परिवार से मिलवा दिया। महिला न सुन सकती थी न बोल सकती थी और न ही पढ़-लिख सकती थी जिसके चलते उसकी पहचान और परिजनों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद कनखल पुलिस ने लगातार प्रयास करते हुए सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों की सहायता से परिजनों का पता लगाया और महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया। पुलिस के अनुसार 1 अगस्त 2026 को थाना कनखल को सूचना मिली कि शंकराचार्य चौक के पास एक महिला अपनी दो वर्षीय बच्ची के साथ रोती हुई मिली है। पूछताछ में पता चला कि वह अपने पति के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार आई थी लेकिन भीड़ में उनसे बिछड़ गई। महिला मूक-बधिर होने के साथ ही अशिक्षित भी थी जिससे वह अपना नाम-पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने उसे थाने लाकर महिला पुलिसकर्मियों की देखरेख में रखा और उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी। महिला और बच्ची की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने उन्हें रानीपुर स्थित वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित ठहराया। साथ ही अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन कर सोशल मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य माध्यमों से महिला की पहचान और परिजनों की तलाश के प्रयास लगातार जारी रखे। पुलिस की मेहनत रंग लाई और सोशल मीडिया के जरिए महिला के ससुर राजकुमार निवासी महेंद्र नगर (नेपाल) हाल निवासी गांधी नगर दिल्ली तक सूचना पहुंची। वह 4 अगस्त को थाना कनखल पहुंचे और महिला की पहचान अपनी पुत्रवधू सुमन तथा बच्ची की पहचान शिवानी के रूप में की। उन्होंने पुलिस को बताया कि महिला का पति करण उर्फ कर्मा जो स्वयं भी बोल नहीं पाता अभी तक घर नहीं पहुंचा है और संभवतः कांवड़ लेकर पैदल ही अपने घर लौट रहा है। परिजनों से मिलते ही महिला की आंखें नम हो गईं। उसने इशारों-इशारों में हरिद्वार पुलिस का आभार व्यक्त किया। इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों ने भी सराहना करते हुए पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली की प्रशंसा की। पुलिस टीम में कोतवाली कनखल प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह रावत वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनुज सिंह हेड कांस्टेबल संजय धनाई कांस्टेबल विजयपाल महिला कांस्टेबल प्रियंका एवं महिला कांस्टेबल सुमन भंडारी शामिल रहे।