प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के अणीमठ गांव की रश्मि देवी ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर स्वरोजगार की मिसाल कायम की है। राज्य सरकार की स्वरोजगारोन्मुखी पहल तथा रीप (रूरल एंटरप्राइज एक्सेलेरेशन प्रोजेक्ट) के सहयोग से उन्होंने अपना रेस्टोरेंट व्यवसाय शुरू किया और आज वह प्रतिमाह लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। रश्मि देवी सिद्धनाथ स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं तथा जय माँ गढ़ी भवानी ग्राम संगठन पर्णखंडेश्वरी क्लस्टर से जुड़ी हुई हैं। रीप परियोजना के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया। 17 सितंबर 2025 को उन्हें रेस्टोरेंट व्यवसाय स्थापित करने के लिए 75 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद रश्मि देवी ने अपने गांव में एक छोटा-सा रेस्टोरेंट शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत बेहतर सेवाओं और ग्राहकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीता। आज उनका रेस्टोरेंट स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की भी पसंद बन गया है। रेस्टोरेंट व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे बच्चों की शिक्षा परिवार की दैनिक जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को नया आधार मिला है। आज रश्मि देवी अपने परिवार के लिए आर्थिक संबल बनने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। रश्मि देवी का कहना है कि यदि उन्हें रीप परियोजना का सहयोग नहीं मिला होता तो उनका अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना शायद पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उनका मानना है कि यदि महिलाएं अवसर का सही उपयोग करें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रीप परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। रश्मि देवी की सफलता इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के अणीमठ गांव की रश्मि देवी ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर स्वरोजगार की मिसाल कायम की है। राज्य सरकार की स्वरोजगारोन्मुखी पहल तथा रीप (रूरल एंटरप्राइज एक्सेलेरेशन प्रोजेक्ट) के सहयोग से उन्होंने अपना रेस्टोरेंट व्यवसाय शुरू किया और आज वह प्रतिमाह लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। रश्मि देवी सिद्धनाथ स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं तथा जय माँ गढ़ी भवानी ग्राम संगठन पर्णखंडेश्वरी क्लस्टर से जुड़ी हुई हैं। रीप परियोजना के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया। 17 सितंबर 2025 को उन्हें रेस्टोरेंट व्यवसाय स्थापित करने के लिए 75 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद रश्मि देवी ने अपने गांव में एक छोटा-सा रेस्टोरेंट शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत बेहतर सेवाओं और ग्राहकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे लोगों का विश्वास जीता। आज उनका रेस्टोरेंट स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की भी पसंद बन गया है। रेस्टोरेंट व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे बच्चों की शिक्षा परिवार की दैनिक जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को नया आधार मिला है। आज रश्मि देवी अपने परिवार के लिए आर्थिक संबल बनने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। रश्मि देवी का कहना है कि यदि उन्हें रीप परियोजना का सहयोग नहीं मिला होता तो उनका अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना शायद पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। उनका मानना है कि यदि महिलाएं अवसर का सही उपयोग करें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रीप परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। रश्मि देवी की सफलता इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।