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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। ग्रामीणों को मत्स्य पालन से जोड़ने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन प्रशिक्षण और योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। विभागीय प्रयासों से कई ग्रामीण मत्स्य पालन को आजीविका का साधन बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। गैड़ बस्ती गांव निवासी बलवीर सिंह राणा भी ट्राउट मछली पालन के जरिए सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। बलवीर सिंह राणा ने अपने गांव में ट्राउट मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने ट्राउट पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया। मत्स्य विभाग की ओर से उन्हें समय-समय पर तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन दिया गया जिसका लाभ उठाकर उन्होंने ट्राउट पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली की बाजार में अच्छी मांग है और उन्हें उपज का बेहतर आर्थिक मूल्य मिल रहा है। बलवीर सिंह राणा ने बताया कि वर्तमान सीजन में उन्होंने करीब 15 क्विंटल ट्राउट मछली का उत्पादन किया। उत्पादित मछली की बिक्री के लिए उन्हें बाजार के साथ संस्थागत खरीदार भी मिले। उनके उत्पादन में से 8 क्विंटल ट्राउट मछली भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस ने खरीदी जबकि शेष मछली स्थानीय बाजार में अच्छे दामों पर बेची गई। ट्राउट मछली की अच्छी मांग के चलते उन्हें इस सीजन में करीब 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने से उन्हें गांव में ही स्वरोजगार का अवसर मिला और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली। उनका कहना है कि पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो इससे अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है। बलवीर सिंह राणा ने बताया कि मत्स्य पालन शुरू करने और इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मत्स्य विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें ट्राउट पालन की तकनीक देखभाल उत्पादन और विपणन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी। विभागीय मार्गदर्शन से उन्हें इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला। जनपद की मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी ने बताया कि मत्स्य विभाग द्वारा ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीणों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा जिला योजना के माध्यम से भी ग्रामीणों को मत्स्य व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीण मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाएं। इसके लिए पात्र लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। ट्राउट पालन जैसे व्यवसायों को बढ़ावा देकर पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला सूचना अधिकारी कृपाल लाल टम्टा ने विभागीय टीम के साथ मत्स्य पालक बलवीर सिंह राणा के तालाबों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने मत्स्य पालन की व्यवस्थाओं तालाबों की स्थिति और संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी भी मौजूद रहीं। मत्स्य पालन से जुड़ रहे ग्रामीणों की सफलता की कहानियां यह दर्शाती हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बलवीर सिंह राणा की सफलता भी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने ट्राउट पालन के माध्यम से न केवल अपने लिए रोजगार का साधन तैयार किया बल्कि यह भी साबित किया कि सरकारी योजनाओं विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

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