प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के लंबित 10 प्रकरणों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को क्षतिपूरक वृक्षारोपण एवं वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया का भली-भांति अध्ययन कर उसके अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तराखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए भूमि खंडों से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर जीआईएस विशेषज्ञ से उसी दिन परीक्षण कराया जाए। इसके बाद अधिकतम तीन दिन के भीतर संबंधित प्रभारी वनाधिकारी को भूमि की उपयुक्तता के संबंध में अवगत कराया जाए ताकि एक सप्ताह के भीतर वन भूमि हस्तांतरण की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके। बैठक में राज्य योजना के अंतर्गत टिहरी विधानसभा क्षेत्र में नैर से पुजाल्डी तक मोटर मार्ग निर्माण के संबंध में बताया गया कि उपजिलाधिकारी धनोल्टी स्तर से भूमि चयन के बाद ग्राम घनसी तहसील नैनबाग की भूमि संबंधी प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाना अपेक्षित है। प्रतापनगर क्षेत्र में तेलुंगा तक सड़क निर्माण के संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा ग्राम सांदणा उप तहसील मदननेगी की भूमि को क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त पाया गया है। इस प्रकरण में संबंधित प्रस्ताव उपजिलाधिकारी प्रतापनगर के स्तर से उपलब्ध कराया जाना है। इसी प्रकार प्रतापनगर क्षेत्र में रैंका महरगांव से मुखेम मोटर मार्ग के संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी को तहसील जाखणीधार के अंतर्गत ग्राम गौसारी आदि के कुल तीन भूमि खंड क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए प्राप्त हुए हैं। इस संबंध में वन विभाग के स्तर से रिपोर्ट प्राप्त किया जाना अपेक्षित है। नीम बीच के पास वन भूमि हस्तांतरण के संबंध में उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर को पत्र प्रेषित किया जा चुका है। वहीं धनोल्टी क्षेत्र में मसोन कांडी द्वारगढ़ पर जयद्वार-सुरांचु तक मोटर मार्ग निर्माण के लिए भूमि चयन हेतु कुल 27 भूमि खंडों की सूची प्रेषित की गई है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित प्रकरणों में आवश्यक प्रस्ताव रिपोर्ट एवं भूमि चयन की कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएं ताकि वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
