प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश के मैदानी जनपदों में पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के लक्षण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग ने रुद्रप्रयाग जिले में भी बचाव एवं रोकथाम के लिए अभियान तेज कर दिया है। जिले में करीब दो दर्जन टीमें गठित कर गांव-गांव पशुओं का टीकाकरण औषधि वितरण और पशुपालकों को रोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शनिवार को पशु चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सचल की टीम ने ग्राम बष्टी में जागरूकता शिविर आयोजित किया। शिविर का नेतृत्व पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.रचना थपलियाल ने किया। शिविर में करीब 35 पशुपालकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान पशुपालकों को लंपी स्किन डिजीज के लक्षण संक्रमण से बचाव और पशुओं के टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई। शिविर के दौरान करीब 92 पशुओं के लिए आवश्यक औषधियों का वितरण किया गया जबकि टीम ने घर-घर पहुंचकर करीब 70 पशुओं का टीकाकरण किया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.आशीष रावत ने बताया कि जिले में स्थापित सभी 16 पशु चिकित्सालयों की ओर से टीमें गठित कर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण करने के साथ ही पशुपालकों को कीटनाशक परजीवीनाशक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली तथा अन्य आवश्यक औषधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने जिले की सभी नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुपालन में संबंधित निकायों की ओर से कार्रवाई की जा रही है। डॉ.रावत ने पशुपालकों से अपने पशुओं को परजीवियों से बचाव के लिए निकटवर्ती पशु चिकित्सालय से आवश्यक औषधियां प्राप्त करने और समय पर टीकाकरण कराने की अपील की। उन्होंने बताया कि लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। संक्रमित पशु के संपर्क में आने अथवा रोग फैलाने वाले परजीवियों के माध्यम से अन्य पशुओं में भी संक्रमण फैल सकता है। उन्होंने बताया कि अगस्त्यमुनि रैंतोली भानाधार और पपड़ासू में करीब दो सौ निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। इन स्थानों पर भी अभियान के तहत पशुओं का टीकाकरण किया गया है। लंपी संक्रमण के दूसरे चरण के तहत 31 अगस्त से अब तक जिले में करीब 3,367 गोवंशीय पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं।
