प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय जनता पार्टी महानगर कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित अभद्र टिप्पणी के विरोध में कर्नल अजय कोठियाल ने प्रेस वार्ता की। कीर्ति चक्र शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित कर्नल कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सैन्य नेतृत्व और कांग्रेस के ऐतिहासिक निर्णयों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नेहरू से राहुल गांधी तक कांग्रेस नेतृत्व की राजनीतिक सोच की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देश की सुरक्षा सेना का सम्मान और राष्ट्रीय हित किसी भी राजनीतिक दल के हितों से ऊपर होने चाहिए। कर्नल कोठियाल उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े सलाहकार निकाय के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। उन्होंने अपने संबोधन में जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर कांग्रेस नेतृत्व के निर्णयों और बयानों को लेकर देश के सामने कई सवाल हैं जिनका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
नेहरू काल तिब्बत और पंचशील समझौते पर उठाए सवाल
कर्नल अजय कोठियाल ने वर्ष 1947 में राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कथित प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय तिरंगे के साथ ब्रिटेन के यूनियन जैक को शामिल करने का विचार भी सामने आया था। उन्होंने इस संदर्भ में कांग्रेस नेतृत्व की तत्कालीन सोच पर सवाल उठाए। वर्ष 1954 के पंचशील समझौते और भारत-चीन संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे के बीच भारत ने तिब्बत के प्रश्न पर ऐसी नीति अपनाई जिसके परिणामस्वरूप भारत और चीन के बीच स्थित तिब्बत का पारंपरिक बफर क्षेत्र कमजोर हुआ। उनके अनुसार इससे चीन को भारतीय सीमाओं के निकट अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पंचशील समझौते से जुड़ी नीति का उस समय भी विरोध हुआ था। इस संबंध में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा राज्यसभा में उठाई गई आपत्तियों और आचार्य जेबी कृपलानी की आलोचना का उल्लेख किया। उन्होंने कृपलानी से संबंधित अंग्रेजी अभिव्यक्ति ‘बॉर्न इन सिन’ का भी जिक्र किया जिसका अर्थ पाप से पैदा हुआ है।
1962 के भारत-चीन युद्ध और सैन्य नेतृत्व पर सवाल
कर्नल कोठियाल ने वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध को भारतीय सैन्य इतिहास का दुखद अध्याय बताते हुए तत्कालीन राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने जनरल उमराव सिंह द्वारा कथित तौर पर फॉरवर्ड पॉलिसी का विरोध किए जाने और उनके साथ हुए व्यवहार का उल्लेख किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल को महत्वपूर्ण सैन्य कमान दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार युद्ध के दौरान सैन्य नेतृत्व में अनुभव योग्यता और परिचालन क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन व्यवस्था में राजनीतिक निकटता को लेकर गंभीर सवाल उठे और सीमावर्ती मोर्चों पर रसद कपड़ों तथा गोला-बारूद की उपलब्धता जैसी चुनौतियों ने सैनिकों की स्थिति कठिन बना दी थी। उन्होंने बीएम कौल और जवाहरलाल नेहरू के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। कर्नल कोठियाल ने कहा कि वर्ष 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों ने असाधारण साहस और देशभक्ति का परिचय दिया लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर की कमियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने बीएम कौल से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए युद्ध के कारणों और तत्कालीन नेतृत्व की जवाबदेही की समीक्षा पर जोर दिया। उन्होंने बीएन मुल्लिक की पुस्तक हिमालयन ब्लंडर और युद्ध से संबंधित प्रकाशित साहित्य के साथ तथाकथित हेंडरसन ब्रूक्स-भगत रिपोर्ट की समीक्षा की आवश्यकता भी बताई।
गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट के शौर्य को किया याद
कर्नल अजय कोठियाल ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1962 के युद्ध में गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया था। उन्होंने रेजांग ला के युद्ध में 13 कुमाऊं के जवानों के साहस और मेजर शैतान सिंह के सर्वोच्च बलिदान को याद किया। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग क्षेत्र में चौथी गढ़वाल राइफल्स की भूमिका और राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के शौर्य का भी उल्लेख किया। जसवंत सिंह रावत को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कर्नल कोठियाल ने कहा कि इन वीर सैनिकों की गाथाएं उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने चौथी गढ़वाल राइफल्स से अपने संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना के शौर्य और बलिदान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़ी घटनाओं का किया उल्लेख
कर्नल कोठियाल ने इंदिरा गांधी के कार्यकाल की कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से ऐतिहासिक जवाबदेही के सवाल उठाए। उन्होंने मार्च 1966 में मिजोरम के आइजोल में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का संदर्भ देते हुए नागरिकों पर हुई बमबारी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने इस घटनाक्रम में तत्कालीन राजनीतिक निर्णयों और जिम्मेदारियों की समीक्षा की आवश्यकता बताई। उन्होंने नवंबर 1966 में गौ-रक्षा की मांग को लेकर दिल्ली में साधु-संतों के आंदोलन और संसद के निकट हुई पुलिस गोलीबारी का भी उल्लेख किया। इस प्रसंग में उन्होंने करपात्री महाराज और उस समय की घटनाओं का संदर्भ दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आपातकाल लगाए जाने नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने वर्ष 1984 में स्वर्ण मंदिर में हुए सैन्य अभियान को भी इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़े विवादास्पद प्रसंगों में शामिल किया।
राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण पर उठाए सवाल
कर्नल कोठियाल ने राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय संस्थाओं और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा संसद में पारित प्रस्ताव से संबंधित अध्यादेश की प्रति राहुल गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से फाड़े जाने की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार इस घटनाक्रम ने तत्कालीन सरकार और उसके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने वर्ष 2018 में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गले मिलने के बाद राहुल गांधी द्वारा आंख मारने की घटना का भी संदर्भ दिया और इसे संसदीय मर्यादा तथा राजनीतिक व्यवहार की दृष्टि से अनुचित बताया। कर्नल कोठियाल ने वर्ष 2026 के एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और एक विमान के अपहरण से जुड़े प्रसंग पर उनकी कथित चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गौरव खिलाड़ियों की उपलब्धियों और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिक्रिया स्पष्ट और जिम्मेदार होनी चाहिए।
जनरल बिपिन रावत और अजीत डोभाल से संबंधित टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
कर्नल अजय कोठियाल ने पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी से संबंधित कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। प्रेस वार्ता से संबंधित सामग्री में जनरल बिपिन रावत के संदर्भ में ‘गली का गुंडा’ और अजीत डोभाल के संदर्भ में ‘मोबाइल कैमरे के अंदर बैठे हैं’ जैसे कथन उद्धृत किए गए। कर्नल कोठियाल ने इन कथनों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों के सम्मान के संदर्भ में अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदाधिकारियों पर राजनीतिक बहस हो सकती है लेकिन ऐसी बहस तथ्यों मर्यादा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए।
अजीत डोभाल के सुरक्षा संबंधी योगदान का किया उल्लेख
कर्नल कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके सुरक्षा और खुफिया क्षेत्र से जुड़े अनुभवों की चर्चा की। उन्होंने पाकिस्तान में गुप्त रूप से काम करने भारत की सुरक्षा से संबंधित खुफिया गतिविधियों राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और विभिन्न सुरक्षा अभियानों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने सिक्किम के भारत में विलय कंधार विमान अपहरण संकट म्यांमार में सीमा पार अभियान वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक वर्ष 2019 की बालाकोट कार्रवाई और वर्ष 2025 के ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में रखा। उन्होंने डोकलाम और गलवान जैसे सीमा विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा नीति में रणनीतिक दृढ़ता और सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय जैसी संस्थाओं के माध्यम से नीति अनुसंधान समन्वय और सुरक्षा संबंधी संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर भी बल दिया।
पंचशील से गलवान तक विदेश नीति और सुरक्षा नीति पर चर्चा
कर्नल कोठियाल ने पंचशील समझौते और वर्ष 1962 के युद्ध के बीच संबंधों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति और सुरक्षा नीति का मूल्यांकन केवल घोषित सिद्धांतों से नहीं बल्कि उनके वास्तविक परिणामों से भी किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि तिब्बत के संबंध में भारत की तत्कालीन नीति और चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनाई गई रणनीति के दीर्घकालीन प्रभावों पर गंभीर चर्चा आवश्यक है। उन्होंने वर्ष 2020 की गलवान घाटी की घटना को भारत-चीन संबंधों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा सामरिक तैयारी और राष्ट्रीय हितों के मामले में किसी भी प्रकार की कमजोरी से बचना चाहिए।
कांग्रेस नेतृत्व से पूछे दो सवाल
कर्नल अजय कोठियाल ने कांग्रेस नेतृत्व से दो प्रमुख सवाल पूछे। उन्होंने पहला सवाल उठाते हुए कहा कि इंदौर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान को कांग्रेस केवल राजनीतिक वक्तव्य मानती है या यह भी स्वीकार करती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों और व्यक्तियों पर की गई टिप्पणियों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरे सवाल में उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस के सभी नेता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान का समर्थन करते हैं और क्या पार्टी इस विषय पर अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करेगी। कर्नल कोठियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर देश को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक दलों का प्रश्न नहीं बल्कि सेना सुरक्षा संस्थानों और देश के नागरिकों के सम्मान से जुड़ा विषय है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं जिम्मेदारी जरूरी
अपने संबोधन के निष्कर्ष में कर्नल अजय कोठियाल ने नेहरू इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को व्यापक राजनीतिक बहस के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व के कुछ निर्णयों और बयानों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सैन्य नेतृत्व और संवेदनशील संस्थागत विषयों पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक निष्ठा से अधिक महत्व योग्यता जवाबदेही और देशहित को दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों पर टिप्पणी करते समय प्रत्येक राजनीतिक नेता को अपने शब्दों और उनके संभावित प्रभाव के प्रति सजग रहना चाहिए। कर्नल कोठियाल ने कहा कि देश के सैनिक और जागरूक नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर स्पष्टता और जिम्मेदारी की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से राहुल गांधी के कथित बयानों पर अपना रुख स्पष्ट करने और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देश के सामने तथ्यात्मक जवाब रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सेना का सम्मान और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और इन विषयों पर किसी भी राजनीतिक दल को जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए।
