प्रदीप कुमार
नई दिल्ली/श्रीनगर गढ़वाल। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और राजधानी के विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के मामले को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एकजुटता बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ और युवा पत्रकारों के साथ फोटो पत्रकारों विभिन्न समाचार एजेंसियों के यूट्यूबर्स और स्वतंत्र पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इनमें वे मीडियाकर्मी भी शामिल रहे जिन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन की कवरेज के दौरान उन्हें परेशान किया गया और अपना पेशेवर कर्तव्य निभाने से रोका गया। यह बैठक प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरूआ पिशारोती ने प्रदर्शन की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर कथित हमलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से बुलाई थी। बैठक में वरिष्ठ पत्रकारों और कथित उत्पीड़न का सामना करने वाले पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें हिरासत में लेकर बसों में बैठा दिया। पत्रकारों के अनुसार इस कार्रवाई के कारण उन्हें अपना पेशेवर दायित्व निभाने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो प्रसारित हो रहे हैं जिनमें महिला पत्रकारों को कथित तौर पर घसीटते हुए धक्का-मुक्की करते और बसों में जबरन बैठाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों के साथ यह व्यवहार उस समय किया गया जब वे विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे। बैठक में वक्ताओं ने रोजी नाम की एक महिला पत्रकार के आरोपों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार रोजी ने विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान यौन उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए उन्हें कई जगह प्रयास करने पड़े लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं। बैठक में इस मामले को लेकर भी चिंता जताई गई। बैठक में शामिल 71 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने बताया कि उन्हें भी धक्का दिया गया और हिरासत में लिया गया। इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री द क्विंट द वायर बीबीसी रेड माइक सहित विभिन्न डिजिटल मीडिया मंचों से जुड़े युवा पत्रकारों ने भी अपने अनुभव साझा किए। महिला और पुरुष पत्रकारों ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की कवरेज के दौरान उन्हें अपमानजनक और प्रताड़ित करने वाले व्यवहार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपने लंबे पेशेवर करियर में उन्होंने पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का ऐसा व्यवहार पहले नहीं देखा था। वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासन जैन सतीश जैकब राजदीप सरदेसाई द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन प्रसिद्ध पत्रकार अजीत अंजुम और सुहासिनी हैदर ने भी पुलिस के व्यवहार की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई के लिए केवल पुलिस को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस पर राजनीतिक नेतृत्व का दबाव रहता है और पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार मीडिया की स्वतंत्रता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी भूमिका को प्रभावित करता है। बैठक के बाद पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ आक्रोश दर्ज कराने के लिए प्रेस क्लब परिसर के बाहर शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला गया। इसमें शामिल पत्रकारों ने मीडियाकर्मियों की सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता करने के अधिकार का मुद्दा उठाया। बैठक के दौरान अनिवार्य पीआईबी कार्ड और पारंपरिक तथा डिजिटल मीडिया के बीच विभाजन को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ऐसे समय में मीडिया बिरादरी के भीतर विभाजन पैदा करने में सफल रही है जब पत्रकारों के बीच एकजुटता की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने मीडिया जगत के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग और एकता को मजबूत करने पर जोर दिया। यह जानकारी सुनील नेगी संपादक यूकेनेशनन्यूज़ की ओर से दी गई।
