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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह के संरक्षण और दिशा-निर्देश में स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी फॉर स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो.बीपी चमोला और सह-समन्वयक प्रो.विजय कांत पुरोहित के निर्देशन में कार्यक्रम के सदस्य डॉ.आलोक सागर गौतम तथा वानिकी विभाग के मान्या कठैत और सूर्यांश सहित 30 से अधिक विद्यार्थियों ने जनजागरूकता गतिविधियों में प्रतिभाग किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने डुंगरीपंथ चमधार कलियासौड़ मां धारी देवी मंदिर परिसर और आसपास के गांवों का भ्रमण कर स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को एकल उपयोग प्लास्टिक के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए इसके अनावश्यक इस्तेमाल से बचने का संदेश दिया। साथ ही बाजार से सामान खरीदते समय प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपड़े के थैलों का उपयोग करने तथा डिस्पोजेबल कप प्लेट और कटलरी के बजाय पुनः उपयोग योग्य विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया। जागरूकता अभियान के दौरान स्वच्छ पर्व और हरित पर्व हरेला जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को त्योहारों और सामुदायिक आयोजनों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने कचरे का उचित निस्तारण करने और पर्यावरण अनुकूल तरीकों से उत्सव मनाने के महत्व से अवगत कराया। उत्तराखंड की पारंपरिक हरित पहल हरेला के संदर्भ में प्रकृति संरक्षण पौधारोपण और जैव विविधता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान कचरा प्रबंधन और स्ट्रीट लाइट से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। ग्रामीणों ने बताया कि कचरा एकत्र करने के लिए नियमित कूड़ा वाहन और उचित निस्तारण की व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कचरा जलाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कचरा जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की समस्या से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। इन समस्याओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी कचरा संग्रहण वैज्ञानिक अपशिष्ट निस्तारण और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और ग्रामीणों के बीच स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश प्रसारित किया गया। इस पहल ने स्थानीय समस्याओं को समझने और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी प्रदान किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह जनभागीदारी सामुदायिक सहयोग और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़ा महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है।

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