श्रीनगर में बैकुंठ चतुर्दशी मेला 4 नवम्बर को दीपदान और भक्ति से झूमेगा नगर
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 4 नवम्बर 2025 को ब्रह्ममुहूर्त से पूर्व आरंभ होकर पूर्ण दिवस और रात्रि तक रहेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,इसी तिथि पर भगवान विष्णु को भगवान शिव ने सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इसी कारण यह दिन हरि और हर दोनों के परम प्रिय दिवस के रूप में वैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।सनातनी परंपरा के अनुसार,श्रीनगर गढ़वाल में हर वर्ष इस अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक वैकुंठ चतुर्दशी मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष भी नगर निगम श्रीनगर और जिला प्रशासन गढ़वाल के तत्वावधान में मेला भव्य रूप में आयोजित होगा।पौराणिक परंपरा के अनुसार,इस पावन अवसर पर सर्वप्रथम शंकर मठ में स्थित चक्र रहित लक्ष्मी-नारायण जी की प्राचीन जीवंत मूर्ति को 765 बत्तियों का दीपदान अर्पित किया जाएगा।वहीं कमलेश्वर महादेव मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष अखंड रात्रि में 365 दीपों से भगवान शिव की आराधना की जाएगी।नगर के विभिन्न धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुजन दीपदान कर पुण्य अर्जित करेंगे और कार्तिक पूर्णिमा तक नगर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण रहेगा।नगर निगम श्रीनगर के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेंद्र प्रसाद बडथ्वाल ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मंदिर परिसर में पॉलिथीन का प्रयोग न करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें,ताकि यह पावन पर्व श्रद्धा और स्वच्छता दोनों का संदेश दे सके।
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श्रीनगर में बैकुंठ चतुर्दशी मेला 4 नवम्बर को दीपदान और भक्ति से झूमेगा नगर
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 4 नवम्बर 2025 को ब्रह्ममुहूर्त से पूर्व आरंभ होकर पूर्ण दिवस और रात्रि तक रहेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,इसी तिथि पर भगवान विष्णु को भगवान शिव ने सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इसी कारण यह दिन हरि और हर दोनों के परम प्रिय दिवस के रूप में वैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।सनातनी परंपरा के अनुसार,श्रीनगर गढ़वाल में हर वर्ष इस अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक वैकुंठ चतुर्दशी मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष भी नगर निगम श्रीनगर और जिला प्रशासन गढ़वाल के तत्वावधान में मेला भव्य रूप में आयोजित होगा।पौराणिक परंपरा के अनुसार,इस पावन अवसर पर सर्वप्रथम शंकर मठ में स्थित चक्र रहित लक्ष्मी-नारायण जी की प्राचीन जीवंत मूर्ति को 765 बत्तियों का दीपदान अर्पित किया जाएगा।वहीं कमलेश्वर महादेव मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष अखंड रात्रि में 365 दीपों से भगवान शिव की आराधना की जाएगी।नगर के विभिन्न धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुजन दीपदान कर पुण्य अर्जित करेंगे और कार्तिक पूर्णिमा तक नगर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण रहेगा।नगर निगम श्रीनगर के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेंद्र प्रसाद बडथ्वाल ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मंदिर परिसर में पॉलिथीन का प्रयोग न करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें,ताकि यह पावन पर्व श्रद्धा और स्वच्छता दोनों का संदेश दे सके।